krishk Bakri Palan Yojna 2026 : यदि आप हिमाचल प्रदेश के निवासी हो तो यह योजना आपके लिए ही है, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती के साथ-साथ एक भरोसेमंद अतिरिक्त आय का स्रोत खोजना हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण रहा है।
ऐसे में बकरी पालन लंबे समय से एक पारंपरिक और व्यावहारिक विकल्प माना जाता है। इसी जरूरत को समझते हुए राज्य सरकार के पशुपालन विभाग ने कृषक बकरी पालन योजना शुरू की है, जिसे 2026 में भी लागू रखा गया है।
आपको बता दें की इस योजना का मकसद केवल किसानों को बकरियाँ बाँटना ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एक स्थायी आजीविका देना है। सरकार उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों की बकरियों पर 60% सब्सिडी देती है, ताकि शुरुआती लागत कम हो और किसान आत्मनिर्भर बन सकें।
krishk Bakri Palan Yojna 2026: योजना का उद्देश्य
- आपको बता दें कि कृषक बकरी पालन योजना को केवल एक सब्सिडी स्कीम की तरह नहीं देखा गया है। इसके पीछे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की एक स्पष्ट सोच है।
- इस योजना के तहत सरकार का उद्देश्य बकरी पालन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आय सृजन के अवसरों को बढ़ाना है।
- यह योजना बकरी पालन इकाइयों पर 60% सब्सिडी प्रदान करती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बकरी पालन शुरू करना आसान हो जाता है।
- बकरी पालन को प्रोत्साहित करना हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास में योगदान देना ।
- उच्च गुणवत्ता वाली बकरी की नस्लें उपलब्ध कराकर, इस योजना का उद्देश्य राज्य में मांस उत्पादन को बढ़ाना ।
इस योजना के जरिये सरकार तीन बड़े लक्ष्य साधना चाहती है। पहला, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए नियमित आय के अवसर पैदा करना। दूसरा, राज्य में मांस उत्पादन बढ़ाकर स्थानीय बाज़ार को मजबूत करना और तीसरा, ग्रामीण इलाकों में टिकाऊ आजीविका के साधन विकसित करना ताकि लोग शहरों की ओर पलायन न करें।
कृषक बकरी पालन योजना के तहत किस तरह की बकरियाँ दी जाती हैं
आपको बता दें की सरकार द्वारा इस योजना के तहत ऐसी नस्लों को चुना गया है जो भारत की जलवायु में अच्छी तरह अनुकूलित मानी जाती हैं और जिनकी मांग बाजार में रहती है। जिनमे मुख्य रूप से बीटल, सिरोही, जमनापारी और श्वेत हिमालयी नस्लें शामिल हैं।
ये नस्लें न केवल मांस उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं, बल्कि इनकी प्रजनन क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है। सरकार चाहती है कि लाभार्थी को ऐसी बकरियाँ मिलें जो लंबे समय तक आय देती रहें, न कि केवल शुरुआती लाभ तक सीमित रहें।
krishk Bakri Palan Yojna 2026 सब्सिडी
आपको बता दें कि सरकार ने योजना को व्यावहारिक बनाने के लिए अलग-अलग आकार की इकाइयाँ तय की हैं। इससे किसान अपनी क्षमता और संसाधनों के अनुसार बकरी पालन शुरू कर सकते हैं।
| इकाई का प्रकार | मादा बकरियाँ | नर बकरा | कुल बकरियाँ | सब्सिडी दर |
|---|---|---|---|---|
| छोटी इकाई | 2 | 1 | 3 | 60% |
| मध्यम इकाई | 4 | 1 | 5 | 60% |
| बड़ी इकाई | 10 | 1 | 11 | 60% |
कृषक बकरी पालन योजना से मिलने वाले लाभ
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमे बकरी पालन की शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है। 60% सब्सिडी मिलने से किसान को केवल शेष राशि का ही इंतज़ाम करना पड़ता है। साथ ही किसान को उच्च गुणवत्ता वाली नस्लें मिलती हैं। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय नस्लों की उत्पादकता सीमित होती है। बेहतर नस्लें मिलने से मांस उत्पादन बढ़ता है और बाज़ार में बेहतर दाम मिलते हैं।
इसके अलावा यह योजना छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों के लिए आत्मसम्मान के साथ कमाई का साधन बनती है। जब किसी परिवार के पास खुद की छोटी सी बकरी इकाई होती है, तो उसे रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
krishk Bakri Palan Yojna 2026 के लिए पात्रता
सरकार द्वारा कृषक बकरी पालन योजना 2026 को समावेशी बनाया गया है। इसमें सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल परिवार, महिलाएँ और भूमिहीन व्यक्ति सभी पात्र हैं, बस शर्त यह है कि वे हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी होने चाहिए।
साथ ही सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि हर आवेदक को बकरी पालन का प्रशिक्षण या जागरूकता कार्यक्रम पूरा करना होगा। यह प्रशिक्षण संबंधित वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभार्थी बकरियों की सही देखभाल कर सके और योजना असफल न हो।
इसमे सबसे ज्यादा प्राथमिकता उन लोगों को दी जाती है जो कि बेरोजगार हैं, जिनकी वार्षिक आय 2 लाख रुपये से अधिक नहीं है और जिनके परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है। इसके अलावा, जिन किसानों ने खुद का बकरी बाड़ा बनाया है या मनरेगा के तहत बनवाया है, उन्हें भी वरीयता दी जाती है।
krishk Bakri Palan Yojna के लिए आवश्यक दस्तावेज
जब भी आवेदन करने जाओ तो इसके लिए कुछ बुनियादी दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होती है। जिसमें :-
- बैंक पासबुक
- आय प्रमाण पत्र
- बेरोज़गारी प्रमाण पत्र
- बीपीएल प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
- प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र (यदि अनुसूचित जाति या जनजाति से हों) शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य दस्तावेज़ों के ज़रिये यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचे और कोई गलत तरीके से सब्सिडी न ले सके।
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krishk Bakri Palan Yojna 2026 के लिए आवेदन कैसे करें
आपको बता दें की योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। चलिए जानते है स्टेप बाइ स्टेप –
- आवेदन करने के लिए आवेदक को सबसे पहले पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है।
- वेबसाइट पर दिए गए दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने के बाद, पात्र आवेदक मैं नियम और शर्तों से सहमत हूँ विकल्प पर टिक करता है और अभी आवेदन करें बटन पर क्लिक करता है।
- इसके बाद ऑनलाइन आवेदन फॉर्म खुलता है, जिसमें व्यक्तिगत जानकारी, आय विवरण और बकरी पालन से जुड़ी जानकारी भरनी होती है।

- फॉर्म भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड किए जाते हैं और अंत में आवेदन सबमिट कर दिया जाता है। आवेदन स्वीकार होने पर संबंधित विभाग द्वारा सत्यापन और आगे की प्रक्रिया की जाती है।
| आधिकारिक वेबसाइट | 👉 Click Here |
| आवेदन फॉर्म | 👉 Click Here |
ध्यान देने योग्य बातें :-
- बकरी पालन का प्रशिक्षण पहले ही पूरा कर लें, क्योंकि इसके बिना आवेदन मान्य नहीं होता।
- अपने पास बकरियों के लिए सुरक्षित बाड़ा होना चाहिए या उसके निर्माण की योजना स्पष्ट होनी चाहिए।
- आय प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज़ अद्यतन और सही होने चाहिए।
- आवेदन करते समय सभी जानकारी ईमानदारी से भरें, क्योंकि सत्यापन के दौरान गलत विवरण पकड़ा जा सकता है।
FAQ-
कृषक बकरी पालन योजना का कार्यान्वयन क्षेत्र क्या है।
फिलहाल यह योजना पूरे हिमाचल प्रदेश में लागू है और राज्य के सभी ज़िलों के पात्र किसान आवेदन कर सकते हैं।
क्या बकरियों पर वास्तव में सब्सिडी मिलती है।
हाँ – सरकार इकाई की कुल लागत पर 60% तक की सब्सिडी देती है, लेकिन वास्तविक राशि नस्ल, बाज़ार दर और इकाई के आकार पर निर्भर करती है।
निष्कर्ष
krishk Bakri Palan Yojna 2026 हिमाचल प्रदेश के गरीब और छोटे किसानों के लिए एक व्यावहारिक और भरोसेमंद अवसर है। यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं देती, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।
अगर कोई किसान धैर्य, मेहनत और सही प्रशिक्षण के साथ बकरी पालन शुरू करता है, तो यह योजना उसकी आजीविका को स्थिर बना सकती है। आशा करते है की आपको यह जानकारी पसंद आई हो जानकारी आपके लिए फायदेमंद रही हो तो आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि औरों को भी यह सही जानकारी मिल सकें | ऐसी ही और फायदेमंद जानकारी पाने के लिए sewacenter24.com के साथ जुड़े रहे |
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